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जीवाणà¥à¤“ं का पता सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¥à¤® à¤à¤‚टोनी वॉन लà¥à¤¯à¥‚वेनà¥à¤¹à¥‰à¤• (1683) ने लगाया था. इनको जीवाणॠविजà¥à¤žà¤¾à¤¨ का जनक (father of bacteriology) कहा जाता है. à¤à¤°à¤¨à¤¬à¤°à¥à¤— (1829) ने इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जीवाणॠ(bacteria) नाम दिया. फà¥à¤°à¤¾à¤‚स के वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• लà¥à¤ˆ पाशà¥à¤šà¤° (1876) ने बताया कि किणà¥à¤µà¤¨ (fermentation) की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ जीवाणà¥à¤“ं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ होती है. इसलिठइनको सूकà¥à¤·à¥à¤® जीव विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ (microbiology) का जनक तथा रोबरà¥à¤Ÿ कोच को आधà¥à¤¨à¤¿à¤• जीवाणॠविजà¥à¤žà¤¾à¤¨ (father of modern bacteriology) का जनक कहा जाता है.
जीवाणॠसबसे सरल, अतिसूकà¥à¤·à¥à¤® तथा à¤à¤• कोशीय (unicellular), आदà¥à¤¯ (primitive) जीव है. ये विशà¥à¤µà¤œà¤¨à¥€à¤¨ अरà¥à¤¥à¤¾à¤°à¥à¤¤ सरà¥à¤µà¤¯à¤¾à¤ªà¥€ जीव हैं जो जल, जीवित व मृत पौधों तथा जंतà¥à¤“ं पर वास करते हैं. ये बरà¥à¤« व गरà¥à¤® जल के à¤à¤°à¤¨à¥‹à¤‚ में 80०C तक के तापकà¥à¤°à¤® पर पाये जाते हैं. इनमें कोशा-à¤à¤¿à¤¤à¥à¤¤à¤¿ ( cell-wall) पायी जाती है, जिसके कारण इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पादप जगत में रखते हैं. आइये इस लेख के मधà¥à¤¯à¤¾à¤® से जानतें है कि जीवाणॠया बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का आरà¥à¤¥à¤¿à¤• महतà¥à¤µ कà¥à¤¯à¤¾ है, कैसे ये हमारे लिठलाà¤à¤•ारी होते है, इनका उपयोग कहा-कहा किया जा सकता है आदि.
जीवाणà¥à¤“ं का आरà¥à¤¥à¤¿à¤• महतà¥à¤µ
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. कृषि में (In agriculture)
कà¥à¤› जीवाणॠà¤à¥‚मि की उरà¥à¤µà¤°à¤¾ शकà¥à¤¤à¤¿ को बà¥à¤¾à¤¤à¥‡ हैं. सà¤à¥€ पौधों के लिठनाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ आवशà¥à¤¯à¤• है. वायà¥à¤®à¤‚डल में नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ लगà¤à¤— 7.8% होती है. पà¥à¤°à¤¾à¤¯: पौधें नाइटà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ के रूप में नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ लेते हैं. पृथà¥à¤µà¥€ में नाइटà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार से बनती हैं-
- नाइटà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¥€à¤•रण जीवाणà¥à¤“ं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ (By nitrogen fixing bacteria)
- नाइटà¥à¤°à¤¿à¤‚ग बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और नाइटà¥à¤°à¥€à¤•ारक जीवाणॠ(Nitrifying bacteria)
- मृत पौधों या जंतà¥à¤“ं के सड़ने से (Decay of dead plants and animal bodies)
- सलà¥à¤«à¤° जीवाणॠसे (Sulphur bacteria)
जानें पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• से बनीं चीजें कितनी हानिकारक हो सकती है
2. डेरी में (In dairy)
कà¥à¤¯à¤¾ आप जानते हैं की दूध में सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤ªà¥à¤Ÿà¥‹à¤•ोकस लैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤µà¤‚ लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¬à¥ˆà¤¸à¤¿à¤²à¤¸ लैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ नामक जीवाणॠपाये जाते हैं. ये जीवाणॠदूध में पाये जाने वाली लाकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸ शरà¥à¤•रा का किणà¥à¤µà¤¨ करके लैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤• अमà¥à¤² (lactic acid) बनाते हैं, जिसके कारण दूध खटà¥à¤Ÿà¤¾ हो जाता है. दूध को 15 सेकंड तक 71०C पर गरà¥à¤® करके शीघà¥à¤°à¤¤à¤¾ से ठंडा करने पर लैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤• अमà¥à¤² जीवाणà¥à¤“ं की संखà¥à¤¯à¤¾ कम हो जाती है. इस कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को पाशà¥à¤šà¥à¤°à¥€à¤•रण (pasteurization) कहते हैं.
लैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤• अमà¥à¤² जीवाणॠ(lactic acid bacteria) दà¥à¤¶ में पाये जाने वाले केसीन नामक पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की छोटी-छोटी बूंदों को à¤à¤•तà¥à¤°à¤¿à¤¤ करके दही जमाने में सहायता करते हैं. दही को मथने से मकà¥à¤–न और गरà¥à¤® करने पर घी तैयार हो जाता है. जब दूध से पनीर को बनाया जाता है तो इस कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¬à¥ˆà¤¸à¤¿à¤²à¤¸ लैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ तथा लà¥à¤¯à¥‚कोनोसà¥à¤Ÿà¥‹à¤• सिटà¥à¤°à¥‹à¤µà¥‹à¤°à¤® à¤à¤¾à¤— लेते हैं.
3. औदà¥à¤¯à¥‹à¤—िक महतà¥à¤µ (Industrial value)
औदà¥à¤¯à¥‹à¤—िक दà¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण से जीवाणॠअतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हैं. उनमें से कà¥à¤› निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हैं-
- सिरके का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ शरà¥à¤•रा घोल से à¤à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¬à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤° à¤à¤¸à¥€à¤Ÿà¥€ नामक जीवाणॠदà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ होता है.
- शरà¥à¤•रा के घोल से बà¥à¤¯à¥‚टाइल à¤à¤²à¥à¤•ोहोल à¤à¤µà¤‚ à¤à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¨ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ कà¥à¤²à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¡à¤¿à¤¯à¤® à¤à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¬à¥à¤¯à¥‚टाइलिकम जीवाणॠदà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जाता है.
- कà¥à¤› जीवाणà¥à¤“ं, जैसे बैसिलस मेगाथीरियम à¤à¤µà¤‚ मिकà¥à¤°à¥‹à¤•ोकस कैंडीडैनस दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ तमà¥à¤¬à¤¾à¤•ू की पतà¥à¤¤à¥€ में सà¥à¤—ंध à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤µà¤¾à¤¦ बॠजाता है जो कि इन जीवाणà¥à¤“ं की किणà¥à¤µà¤¨ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ होता है.
- चाय के उदà¥à¤¯à¥‹à¤— और चमड़ा के उदà¥à¤¯à¥‹à¤— में à¤à¥€ जीवाणà¥à¤“ं का काफी महतà¥à¤µ है.
4. औषधियां (Medicines)
कà¥à¤› à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं जीवाणà¥à¤“ं की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से बनाई जाती हैं, जैसे बैसिलस बà¥à¤°à¥‡à¤µà¤¿à¤•à¥à¤¸ से à¤à¤‚टीबायोटिक-थायरोकà¥à¤¸à¤¿à¤¨ और बैसिलस सबà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤¸ से à¤à¤‚टीबायोटिक- सबà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤¨ आदि.
5. विविध (Miscellaneous)
कà¥à¤› जीवाणॠकारà¥à¤¬à¤¨à¤¿à¤• मल पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ जैसे गोबर, मल व पेड़-पौधों की सड़ी-गली पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को खाद तथा हà¥à¤¯à¥‚मस में बदलकर उपयोगी बनाते हैं. à¤à¤¶à¤°à¤¿à¤•िया कोली नामक जीवाणॠमनà¥à¤·à¥à¤¯ व दà¥à¤¸à¤°à¥‡ जंतà¥à¤“ं की छोटी आंत में रहता है और विटामिन का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करता है.
à¤à¤¸à¤¾ कहना गलत नहीं होगा की जीवाणॠहामारी काफी मदद करते हैं, आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सहायता करते है जैसे की हमने ऊपर आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में देखा परनà¥à¤¤à¥ कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ à¤à¥€ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚ है जीवाणà¥à¤“ं की जिनसे नà¥à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤¨ à¤à¥€ पहà¥à¤šà¤¤à¤¾ है जैसे कि à¤à¥‹à¤œà¤¨ का सड़ना, रोग का होना, कपास का नाश आदि.
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